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भारतीय टैक्स प्रणाली और उसके अलग अलग टैक्स प्रकार पूरी जानकारी

भारत की प्रणाली पूरी दुनिया मे सबसे बड़ी और अलग टैक्स प्रणाली है। और भारत सरकार टैक्स भरने वालो से अलग अलग प्रकार के टैक्स लगाती है। और इसी टैक्स के पैसे से देश के विकास का काम किया जाता है। आप इस सबसे वाकिब होंगे की टैक्स का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन क्या आपको पता है। टैक्स के कितने सारे प्रकार है। अगर नहीं तो जान लेंगे।




क्या आपकी इनकम टैक्सेबल है क्या आप टैक्स भरते है। एक मजेदार बात मे आपको बताना चाहूंगा की मेरी इनकम इतनी नहीं है की मुझे टैक्स भरना पड़े लेकिन मेरे अनजाने मे भी मे कई तरह के टैक्स भरता हु इसकी जानकारी मुझे भी नहीं थी। 


    टैक्स के प्रकार :


    सबसे पहले जानते है प्रमुख २ टैक्स प्रकारो के बारे मे 


    १ प्रत्यक्ष कर :(डायरेक्ट टैक्स )

    प्रत्यक्ष टैक्स मतलब आप आपके टैक्स का हिस्सा सीधे सरकार के पास जमा करते है। अगर आपकी इनकम टैक्सेबल है तो आपको सीधे इनकम टैक्स फाइल करना होता है इसके आलावा ऐसे अन्य प्रकार भी है जिसमे सीधे टैक्स वसूला जाता है। 

    २ अप्रतक्ष्य कर :(इन डायरेक्ट टैक्स )


    इस तरह के विकल्प मे आपसे अप्रतक्ष्य रूप से टैक्स वसूला जाता है इसके लिए ऐसा जरुरी नहीं की आपकी इनकम टैक्सेबल हो आप GST के टैक्स से अच्छे से वाक़िब होंगे। आप जो सेवा और वास्तु इस्तेमाल करते है उसपर टैक्स चार्ज लिया जाता है और फिर उस टैक्स सेवा या फिर वास्तु विक्रेता सरकार को देता है। 


    १ इनकम टैक्स :


    इनकम टैक्स के बारे मे सब लोग जानते है और अगर आपकी इनकम टैक्सेबल स्लैब मे आती है तो आपको टैक्स भरना पड़ता है। टैक्स प्रतिशत आपके टैक्स स्लैब इनकम पर निर्भर करता है। 

    नया  टैक्स स्लैब टैक्स प्रतिशत टैक्स की राशि
     २ लाख ५० हजार 0%
    २ लाख ५० हजार से ५ लाख 5%12500
    ५ लाख से ७ लाख ५० हजार 10%25000
    ७ लाख ५०  हजार से १० लाख 15%37500
    १० लाख से १२ लाख ५० हजार 20%50000
    १२ लाख ५० हजार से १५ लाख 25%62500
    १५ लाख के ऊपर 30%150000



    २ कैपिटल गेन टैक्स :


    इस टैक्स प्रकार मे अगर आप खुद की कोई प्रॉपर्टी बेचते हो तो उसके ऊपर के प्रॉफिट पर आपको टैक्स भरना पड़ता है। इसके आलावा अगर आप शेयर बाजार मे निवेश करते है  तब आप किसी शेयर या फिर बांड को बेचते है तो ऐसे सेल्लिंग पर आपको कैपिटल गेन टैक्स देना पड़ता है। यहाँ पर आपको छोटे समय के लिए और लम्बे समय के लिए २ तरह के कैपिटल गेन टैक्स देने पड़ते है। अगर आप किसी फिक्स्ड एसेट को ३ साल के अंदर बेचते हो तो ये छोटे समय का कैपिटल गेन टैक्स होगा लेकिन ३ साल बाद बेचते हो तो लम्बे अवधि का कैपिटल गेन टैक्स माना जाएगा और यहा पर आपको टैक्स नहीं देना पड़ेगा। 

    ३ कॉर्पोरेट टैक्स :


    जिस तरह आपको आपके इनकम पर इनकम टैक्स देना पड़ता ठीक उसी तरह कॉर्पोरेट टैक्स जो कंपनी को इनकम पर भरना पड़ता है। यहाँ पर टैक्स मे किसी भी प्रकार की छूट नहीं मिलती है। लेकिन विदेशो कंपनी और विदेशी कंपनी इन २ प्रकारो मे टैक्स का रेट अलग अलग है। 

    कंपनी प्रकार     १० मिलियन से कम इनकम   १० मिलियन से ज्यादा  इनकम 
    भारतीय कंपनी   ३०%   ३०% 
    विदेशी कंपनी  ४०% ४०% 

    • भारतीय कंपनी जिसकी सालाना  इनकम १० मिलियन से कम उन्हें ३० फीसदी टैक्स सरचार्ज और एजुकेशन देना पड़ता है। 
    • भारतीय कंपनी जिसकी सालाना इनकम १० मिलियन से ज्यादा है उन्हें ४० फीसदी टैक्स और एकसाशन सेस देना  है। 
    • विदेशी कंपनी जिसकी सालाना  इनकम १० मिलियन से कम उन्हें ३० फीसदी टैक्स सरचार्ज और एजुकेशन देना पड़ता है। 
    • विदेशी कंपनी जिसकी सालाना इनकम १० मिलियन से ज्यादा है उन्हें ४० फीसदी टैक्स और एकसाशन सेस देना  है। 


    ४ GST टैक्स :


    केंद्र सरकार ने १ जुलाई २०१७ से GST मतलब गुड्स एंड सर्विस टैक्स वास्तु और सेवा कर इस नए टैक्स प्रणाली को लाहु किया इसमे भारत सरकार ने १५ तरह के टैक्स प्रकारो को बंद किया। अब आप जिस वास्तु या फिर सेवा को खरीदते है आपको सीधे GST टैक्स देना पड़ता है। 

    ५ LTCG :


    LTCG का मतलब लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स मतलब जब आप शेयर बाजार मे किसी शेयर होल्डिंग को १ साल तक होल्ड करके उसके बाद बेचते है तो आपको LTCG टैक्स देना पड़ेगा। आज का LTCG टैक्स रेट है २० फीसदी। अगर आप १ मार्च को २०२० को कोई शेयर खरीदते हो और उसे अगले साल ३ मार्च २०२१ को बेच देते हो तो आपको LTCG टैक्स भरना होगा। 


    ६  सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स :(STT )


    जब आप शेयर मार्किट ट्रेडिंग करते है तब आपका ब्रोकर आपके शेयर खरीद और बिक्री के ऊपर STT टैक्स लगता है जो की सीधे आपके इनकम से लिया जाता है। ये एक कैपिटल गेन टैक्स का प्रकार है और शेयर बाजार के हर एक व्यव्हार पर आपको STT देना पड़ता है। हलाकि STT इतना ज्यादा नहीं होता और आपके शेयर के प्राइस मे ही ऐड हो जाता है। आप STT के लेटेस्ट रेट के बारे मे आपके ब्रोकर के सहातया से जान सकते है। 

    ७ Perquisite टैक्स :(  स्टाफ को मिलने वाली सुविधावो पर टैक्स )


    जब कंपनी अपने स्टाफ को बिज़नेस के आलावा कुछ फायदे देती है जैसे की कंपनी की तरफ से दी जाने वाली कार ,क्लब मेम्बरशिप ,ऐसे सुविधा जो की कंपनी स्टाफ के फायदे के लिए देती इसपर Perquisite  टैक्स भरना पड़ता है। लेकिन कंपनी के काम के लिए कुछ कार जैसे का इस्तेमाल किया जा रहा है तो टैक्स नहीं देना पड़ता। इसे पहले FBT फ्रिन्गल बेनिफिट टैक्स कहा जाता है लेकिन अब इसमे बदलाव किया गया है। 

    ८   पोफेशनल टैक्स :(व्यावसायिक कर )


    अगर आप एक व्यावसायिक तरीके से इनकम प्राप्त करते है तो आपको इस टैक्स को भरना पड़ेगा। ये इनकम टैक्स जैसा ही होता है लेकिन इसे राज्य सरकार चार्ज करती है। और इसे आपको हर महीना देना पड़ता है और इसे आपके एम्प्लायर के जरिये लिया जाता है। और इस टैक्स का रेट हर राज्यों मे अलग अलग है। इस टैक्स को मुसिपल की तरफ से लिया जाता है आप इसे मुसिपल टैक्स भी कह सकते है। 

    ९   डिविडेंड डिस्ट्रबीशन टैक्स :



    जो डिविडेंड निवेशक को दिया जाता है उसपर कोई टैक्स नहीं लगता है लेकिन कंपनी को डिविडेंड पर टैक्स देना पड़ता है और अभी फिलहाल डिविडेंड का टैक्स रेट २०.५६ फीसदी है। अगर कोई कंपनी अपने प्रॉफिट पर डिविडेंड नहीं देती है तो उनका कॉर्पोरेट टैक्स भरना पड़ता है।

    १०  स्टाम्प ड्यूटी :



    जब आप किसी नयी प्रॉपर्टी को खरीदते है तब स्टाम्प ड्यूटी भी आपको देनी पड़ती है और ये कीमत आपके प्रॉपर्टी के कीमत मे ऐड की जाती है। इसके आलावा रजिस्ट्रेशन शुल्क भी आपको सेलर को देना पड़ता है।


    ११   गिफ्ट टैक्स :


    अगर आपको  कोई गिफ्ट देता है टी इसे भी एक इनकम माना जाता है आपको इसपर भी टैक्स देना पड़ता है अगर आप एक साल मे  ५० हजार से ज्यादा का गिफ्ट स्वीकार करते है तब आपको गिफ्ट टैक्स देना पड़ता है।

    १२  टोल टैक्स :

    जब आप हाईवे का इस्तेमाल करते है उसके लिए आपको टोल प्लाजा पर पैसे देने पड़ते है इसे ही टोल टैक्स कहा जाता है। हलाकि टोल टैक्स आपको सिर्फ उस रस्ते से जाने के समय ही देना पड़ता है।


    १३  वेल्थ टैक्स :


    वेल्थ टैक्स मतलब आपकी जो सम्पति होती है उसपर टैक्स लिया जाता है। ३० लाख के ऊपर के सम्पति पर  आपको १ फीसदी वेल्थ टैक्स देना पड़ता है।

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