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किसानों को लोन देने के लिए ICICI बैंक की नई पहल सैट लाइट डेटा का होगा इस्तेमाल

 मुम्बई: निजी क्षेत्र की सबसे बड़ी बैंको मैं से एक माने जाने वाली ICICI बैंक ने किसानों को लोन देने के लिए सैट लाइट डेटा का इस्तेमाल करने की पहल निकाली है इस तरह के सुविधा के जरिये  लोन देने वाला ICICI बैंक पहला बैंक बन गया है ICICI बैंक ने दी जानकारी के मुताबिक सैट लाइट डेटा के जरिये किसानों के लोन लेने के पात्रता को जांच जाएगा और पात्र किसानों को तुरंत लोन दिया जाएगा आपको बात दे की भारत मैं इस तरह की पहल पहली बार इस्तेमाल की जा रही है जब की विदेश के के बैंक इस तरह के डेटा का इस्तेमाल करके लोन देती है 



अर्थ ऑब्ज़ेर्वशन सैटेलाइट के डेटा का किया जाएगा इस्तेमाल :

  • ICICI बैंक इस पहल के जरिये किसानों के =लोन पात्रता को जांचने के लिए अर्थ ऑब्ज़ेर्वशन सैटेलाइट की मदत लेगा इस सैटेलाइट मैं डेटा इमेजनरी का इस्तेमाल होगा 
  • सैटेलाइट के जरिये मील हुए डेटा से जमीन की सिंचाई और फसल पद्धति की जानकारी बैंक को मिल  सकेगी 
  • ICICI बैंक ने आगे कहा की लोन को तुरंत देने के लिए इस डेटा के साथ डेमोग्राफिक और फाइनेंसियल पैरामीटर्स का भी इस्तेमाल किया जाएगा 

बैंक ने अग्रि फिनटेक कंपनी से की है भागीदारी :

  • ICICI बैंक ने किसानों की पात्रता बढ़ाने और तुरंत लोन देने के लिए अग्रि फिनतेक कंपनी वो के साथ भागीदारी की है 
  • इसमे प्रमुख स्पेस टेक्नोलॉजी और वेदर इनफार्मेशन का इस्तेमाल शामिल है 
  • बैंक ने आगे कहा की इस तरह सैटेलाइट डेटा के जरिये लोन पात्रता का आकलन जल्दी हो सकेगा जिसे इस समय कम से कम 15 दिन का समय लगता है 
  • इस समय बैंक महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश के 500 गावो का सैटेलाइट डेटा इस्तेमाल कर रहा है लेकिन बैंक इसे जल्द ही देश के 63000 हजार गावो मैं विस्तारित करने के योजना बना रही है 

आधुनिक तकनीक से सटीकता है किया जाएगा पात्रता का आकलन :

  • सैटेलाइट डेटा के जरिये किसान के भूमि का आकलन पूरी तरह से कॉन्टैक्टलेस तरीके से किया जा सकेगा 
  • इस डेटा का आकलन करते वक़्त बैंक को पिछले साल की बारिश मिट्टी के नामी का स्तर आदि भूमि के फसल से जुड़ी सारी जानकारी मिलेगी जिससे किसान की पात्रता भी बढ़ेगी साथ ही सटीकता लाने मैं भी मदत होगी 
  • पुराने तकनीक मैं बैंक के प्रतिनिधि को किसान के जमीन के जगह जाकर उसका आकलन करना पड़ता था जिसमे समय के साथ साथ सटीकता का भी सवाल खड़ा होता था 

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