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कोरोना महामारी और लॉक डाउन के बिच टेक्नोलॉजी ने आसान की हर मुश्किल :संजय दत्ता

मुश्किल घड़ी में टेक्नॉलिजी बना आपका साथी

पूरी दुनिया कोरोना महामारी की मार झेल रही है। वर्ल्ड हेल्थ ऑरगेनाइजेशन ने इसे पैनडैमिक घोषित किया है। लेकिन मुश्किल की इस घड़ी टेक्नॉलिजी आपके मुसीबत का साथी बनकर उभरा है। हेल्थ अथॉरिटीज ने इस वायरस से बचने के लिए लोकल और नेशनल लेवल पर अभियान चलाया हुआ है। ये वायरस 150 से भी ज्यादा देशों में फैल चुका है। लेकिन टेक्नॉलिजी के कारण लोगों को इसके प्रति जागरुक किया जा रहा है।

 

टेक्नॉलिजी इस मिशन में कैसे मददगार है

कोरोनोवायरस के खतरे को कम करने के लिए सार्वजनिक हित में जारी किए गए किए कई सामान्य परामर्शों हैं, जिनमें सोशल डिस्टेसिंग समेत कुछ और उपाय बताए गए हैं। हालांकि, कुछ ऐसी स्थितियां बताई गई है, जिसका पालन पूरी तरह से संभव नहीं हो सकता है।

उदाहरण के लिए, यदि आपको अपनी लैप्स हो चुकी पॉलिसी को रिनिन्यु करना है या फिर उसके लिए क्लेम करना है। तो आपको बीमाकर्ता के ऑफिस जाना पड़ेगा, लेकिन इस दौर में ट्रैवलिंग एक रिस्की काम है। यहां टेकनॉलिजी आपकी मदद करेगा। कुछ कंपनियों ने इसके लिए मोबाइल सेल्फ इंस्पेक्शन की सुविधा शुरु की है। जिससे आप बिना बीमाकर्ता के दफ्तर गए अपना क्लेम कर सकते हैं।

बहुत सारे बीमाकर्ताओं ने इसके लिए एप बनाए हैं, जिसके जरिए आप अपने डॉक्युमेंट अपलोड करके भेज सकते हैं। टेक्नॉलिजी की मदद से आप बिना कार्यालय गए अपने सारे काम घर बैठे बिना झंझट के कर सकते हैं। ऑलनाइन प्रोसेस बिल्कुल आसान तरीका है। डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए आपके काम जल्दी और तेज गति से हो जाते हैं।

स्वास्थय सेवाओं में भी हस्तेक्षप

अब केवल मोटर बीमा में ही नहीं बल्कि स्वास्थय सेवाओं में भी टेक्नॉलिजी अहम रोल अदा कर रही है। आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस के जरिए जो काम पहले घंटो में होता था वो अब मिनटों में हो जा रहा है। यहां ध्यान देने वाली बात है कि क्लेम सेंटलमेंट एक जटिल पक्रिया है, जिसमें कई बार बीमाकर्ता के दफ्तर, थर्ड पार्टी (टीपीए) के यहां जाना, यहां तक की डॉक्टर के पास जाना पड़ता है।

टेक्ऩॉलिजी का विकास होने से अब चीजें काफी बदल गई हैं। खासकर आर्टिफिशयल इंटेलिजेंस ने पूरे सिस्टम को बेहद आसान बना दिया है। एआइ बेस्ड काम होने से अब बेहद कम समय में बिना द्फ्तरों के चक्कर लगाए सारे काम आसानी से हो जाते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए अब क्लेंम सेटमेंट हाथों हाथ हो रहा है।

अंत में

तकनीकी प्रगति ने न केवल बीमाकर्ताओं के लिए दक्षता और सुव्यवस्थित संचालन में सुधार किया है, बल्कि इन समय में संकटग्रस्त लोगों के लिए एक वरदान के रूप में काम कर रहा है। टर्नअराउंड समय (TAT) को कम करके और तत्काल स्वीकृतियों में जाने से, और लोगों को कोविद -19 से संक्रमित होने से सुरक्षित रखने से, आने वाले दिनों में डिजिटल का दौर का शुरूआत होने की उम्मीद है।  इसके अलावा, देश में वृद्धि पर कोविद -19 के साथ, अधिकतम संभव कार्यों को पूरा करने के लिए प्रौद्योगिकी पर बैंक की सलाह दी जाती है। सुरक्षित रहें, सतर्क रहें।

लेखक

संजय दत्ता

चीफ – क्लेम्सअंडराइटिंग एंड रिइंश्योरेंस

आईसीआईसीआई लोबांर्ड जनरल इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड

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